रिश्तों में आई दरार: पति-पत्नी का तलाक, सामान भी हुआ वापस!
पब्लिक न्यूज हिंदी ट्वेंटी फोर:-
अम्बेडकर नगर/पवई थाना क्षेत्र
पवई थाना क्षेत्र के अंतर्गत शाहमर्दांनपुर गाँव का एक पारिवारिक मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, बलराम वेनवंशी पुत्र श्रीराम बेनवंशी की शादी 18 फरवरी 2022 को ग्राम मकरहीं, थाना हंसवर, जिला अम्बेडकर नगर निवासी प्रीति (पुत्री विक्रम बेनवंशी) के साथ हुई थी।
शादी के बाद कुछ समय तक दोनों के बीच सब कुछ सामान्य रहा और उनके यहां एक पुत्री का जन्म भी हुआ, जो वर्तमान में मां के साथ है।
गत वर्ष 2025 में
किसी बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद उत्पन्न हो गया, जो धीरे-धीरे बढ़ता गया।
पहले लड़का पक्ष वाले विदाई की बात फिर 1-2 महीने तक विदाई का कोई निष्कर्ष नहीं निकला लड़की मा-बाप नात रिश्तेदार लाख समझाने के बाद ससुराल जाने के लिए तैयार ही नहीं हुई
मामला इतना बढ़ गया कि बात तलाक तक पहुँच गई। इस दौरान ये बात शादी के अगुआ तक पहुँची शादी के अगुआ कांता प्रसाद द्वारा दोनों पक्षों को बहुत समझाने और विवाद सुलझाने की काफी कोशिश की गई, ताकि परिवार टूटने से बच सके, लेकिन प्रयास सफल नहीं हो सका !
अंततः दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया। तलाक के बाद आपसी समझौते के तहत दोनों पक्षों ने एक-दूसरे का दिया हुआ सामान वापस कर दिया। साथ ही, बच्ची को मां के पास रखने का निर्णय लिया गया।
आपसी समझौता :-
यह समझौता पत्र दोनों पक्षों (लड़का पक्ष एवं लड़की पक्ष) के बीच आपसी सहमति से तैयार किया गया है।
दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक संबंध पूर्ण रूप से समाप्त हो चुका है तथा आपसी सहमति से तलाक हो गया है।
तलाक के उपरांत दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक-दूसरे को दिया गया समस्त सामान वापस कर दिया है और इस संबंध में किसी प्रकार का कोई विवाद शेष नहीं है।
दोनों पक्ष यह सहमति देते हैं कि भविष्य में इस मामले को लेकर कोई भी कानूनी कार्रवाई, शिकायत या दावा नहीं किया जाएगा। यदि कोई पक्ष भविष्य में कोई विवाद उत्पन्न करता है, तो यह समझौता साक्ष्य (सबूत) के रूप में मान्य होगा।
दोनों पक्षों के बीच जन्मी बच्ची वर्तमान में अपनी माता के साथ रहेगी और उसकी देखभाल एवं पालन-पोषण माता द्वारा किया जाएगा।
यह भी आपसी सहमति से तय हुआ है कि जब बच्ची की आयु 5 वर्ष पूर्ण हो जाएगी, तब लड़का पक्ष उसे अपने पास लाकर उसका पालन-पोषण करेगा।
तब तक (5 वर्ष की आयु तक) बच्ची पूर्ण रूप से अपनी माता के संरक्षण में रहेगी और लड़का पक्ष इस पर कोई आपत्ति नहीं करेगा।
यह समझौता दोनों पक्षों द्वारा बिना किसी दबाव, भय या प्रलोभन के स्वेच्छा से किया गया है।
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